पेंटिंग के साथ प्यार

 यह बात जब की है जब अनिल eleven वी कक्षा में पढता था अनिल पढ़ाई में तो ज्यादा अच्छा तो नहीं था but वह पेंटिंग बहुत ही अच्छी तरह बनाता था उसकी पेंटिंग की हम कितनी भी तारीफ कर ले वो बहुत ही कम है

अगर आप अनिल के सामने खड़े हो तो आपकी पेंटिंग वैसी ही अनिल बना देगा एक दिन अनिल अपने घर में पेंटिंग कर रहा था उसके पापा ने जब पेंटिंग देखी तो कहा की तुम पढ़ाई तो अच्छी तरह करते नहीं हो और इस पेंटिंग से तुम्हे क्या मिलेगा


 अगर तुम पढ़ाई अच्छी तरह कर लेते हो तो एक नौकरी तो तुम्हे मिल ही जायेगी पर पेंटिंग से तुम्हे कुछ हासिल नहीं होगा, अगर यह हुनर तुम्हारा पढ़ाई में होता तो कितना अच्छा होता थोड़ा बहुत मन पढ़ाई में भी लगा लो अनिल के पापा यह बात कहकर चले गए

सच्चा प्यार क्या है

अनिल की माँ ने कहा की तुम जो चाहे  करो पर जीवन में बहुत अच्छा आदमी बनना जिससे दुनिया तुम पर गर्व करे माँ यह कह कर चली गयी, अगले दिन रीमा अनिल से मिली और कहा की तुम मेरी भी एक पेंटिंग बना दोगे अनिल कहा ठीक है रीमा ने अगले दिन अनिल को अपने घर पर बुलाया

 अपनी पेंटिंग बनाने के लिया कहा अनिल रीमा की पेंटिंग (Paintings) बना रहा था रीमा अनिल को देख रही थी, अनिल रीमा की पेंटिंग बना रहा था पेंटिंग भी ऐसी बन रही थी की रीमा पेंटिंग से बहार भी है और अंदर भी है, तभी रीमा के पिता कमरे में एंटर हुए और रीमा की पेंटिंग देखी रीमा के पिता को पेंटिंग बहुत अच्छी लगी,

अनिल से कहा की एक दिन तुम बहुत बड़े आदमी बनोगे, अनिल को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की मेरे पापा कहते है की पेंटिंग से कुछ भी नहीं होगा और रीमा के पिता कहते है की तुम बहुत बड़े आदमी बनोगे कुछ बात समझ नहीं आ रही थी अनिल कहा की अब मुझे चलना चाहिए काफू देर हो चुकी है, 

रीमा को धीरे-धीरे अनिल से “प्यार” हो गया था और वह हर रोज अनिल से मिलने लगी और दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे अनिल ने यह बात अपनी माँ को बताई और अनिल की माँ ने कहा की यह ठीक नहीं है अभी तुम इतने बड़े नहीं हो जिससे की तुम्हरी शादी हो सके,

अभी तो तुम्हे कुछ बनना है तभी यह मुमकिन हो सकता है माँ की बात सुनकर अनिल को भी यह ठीक लगा और अनिल ने सोचा की जब कुछ बन जायूँगा तो शादी हो जायेगी माँ की बात अनिल ने मान ली कुछ दिन बाद रीमा के पिता ने कहा की उस लड़के को बुलाओ जिसने तुम्हारी पेंटिंग बनाई थी

अनिल रीमा के पिता के पास गया और रीमा के पिता ने एक पेंटिंग बनवायी और कुछ दिन बाद रीमा के पिता ने कहा की अनिल को एक कम्पनी में जॉब मिल जायेगी वह कम्पनी अच्छी-अच्छी पेंटिंग को आर्ट गैलरी में बेचती है

इस तरह अनिल को बहुत अच्छी नौकरी मिल गयी, रीमा के पिता और अनिल के पिता की मंजूरी से अनिल और रीमा की शादी हो गयी यह “प्यार” भी बहुत जल्द हुआ और बहुत जल्द शादी भी हो गयी यहां पर एक नज़रिया यह भी है की अगर आप कामयाब है तो कुछ भी हो सकता है,


प्यार के लिए कामयाबी :- 

सब कुछ हमारी कामयाबी पर ही निर्भर होता है यह समय ही कुछ और है जिस जगह पर कामयाब लोग है तो उनका पूछा जाता है और जो कामयाब नहीं है उन्हें कोई नहीं जनता है इसलिए जीवन में ऐसा काम करिये जिससे आपको कामयाबी मिले और आपको भी लगे की में कुछ हु, शायद तभी आप कुछ भी पा सकते है, असली प्यार की कहानी, love tale in hindi, (love tales in hindi) अगर आपको यह कहानी पसंद आयी है तो आगे भी शेयर करे और हमे भी बताये

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